पर कहानी यहीं शांत नहीं हुई। अतीत कभी-कभी दरवाज़ा खटखटाकर नहीं आता, सीधे तोड़कर अंदर घुसता है। जिस जगह से कबीर सृष्टि को निकालकर लाया था…वहाँ एक और कहानी अधूरी रह गई थी।एक नाम—विशम्बर नाथ।चालीस साल का। अहंकारी। पैसे और ताकत के दम पर रिश्ते खरीदने वाला।वही आदमी जिससे सृष्टि से ज़बरदस्ती शादी करने वाला था।वही आदमी जिसके दबाव, डर और हिंसा के बीच सृष्टि का गर्भ गिर गया था।उस दिन जब कबीर उसे वहाँ से लेकर गया, सबके सामने—विशम्बर नाथ की इज़्ज़त को ठेस पहुँची थी।और कुछ लोगों के लिए औरत से ज़्यादा अहम उनकी “इज़्ज़त” होती है।दूसरी तरफ…विशम्बर