ज़ख्मों की शादी - 21

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सुबह का समय था। घर में अजीब सी चुप्पी थी। कबीर ने बिना बहस किए धीरे से कहा,सृष्टि… हमें डॉक्टर के पास चलना चाहिए।सृष्टि ने विरोध नहीं किया। उसकी आँखें सूजी हुई थीं। वो थकी हुई लग रही थी। जैसे रात भर लड़ती रही हो…अपने ही डर से। कबीर उसे एक मनोचिकित्सक (psychiatrist) के क्लिनिक में ले गया।रिसेप्शन पर औपचारिकताएँ पूरी हुईं। फिर नर्स ने सृष्टि को अंदर बुलाया।डॉक्टर ने कबीर की ओर देखा और बोली—आप बाहर प्रतीक्षा कीजिए।मुझे सृष्टि से अकेले में बात करनी होगी।कबीर चुपचाप बाहर चला गया। पहली बार उसने बिना सवाल किए पीछे हटना सीखा। डॉक्टर के