तुम, मैं और वो शाम

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तुम, मैं और वो शाम(एक हिंदी कहानी – न्यूनतम 2000 शब्द)  लेखक: विजय शर्मा एरी---प्रस्तावनाशामें अक्सर जीवन की सबसे गहरी यादें समेटे होती हैं। दिनभर की भागदौड़, शोरगुल और थकान के बाद जब सूरज ढलता है, तो मन भी किसी अनकही तलाश में निकल पड़ता है। यह कहानी भी ऐसी ही एक शाम की है—जहाँ "तुम", "मैं" और "वो शाम" तीनों मिलकर एक ऐसा अनुभव रचते हैं, जो जीवन की धड़कनों में हमेशा के लिए दर्ज हो जाता है।  ---पहला दृश्य: शहर की हलचल से दूरमैं उस दिन जल्दी ही दफ्तर से निकल आया था। मन में एक अजीब-सी बेचैनी थी। सड़कें