चलो दूर कहीं... 11प्रतीक्षा ने 'अनाह' जोर से चिल्लाई और उठकर उस आकृति के पीछे दौड़ी तो रवि ने कहा,"संभलकर प्रतीक्षा अभी तुम्हारे पैर के घाव हरे है..!" लेकिन उसे इसकी सुध कहां थी, पलक झपकते ही वह झोपड़ी के बाहर थी और आंखें फाड़कर इधर उधर देख रही थी पर अनाह क्या उसकी परछाई भी नजर नहीं आ रही थी..! रवि भी उसके पीछे था, उसे हैरत से इधर उधर देखते देख उसने पूछा, "क्या हुआ किसे ढूंढ रही हो..? और ये अनाह कौन है..?" "दोस्त हैं मेरा.. मुझे लगा वह यहां से गुजरा है.. लेकिन ये मेरा भ्रम था..!" "एक तरफ