भाग 4: दंडाधिकरण के सामनेचौराहे का पुराना बरगद वृक्ष सदियों से खड़ा था, पर आज रात उसकी उपस्थिति में एक अलौकिक भय समाया हुआ था। आधी रात का वक्त था, और सुनसान सड़क पर सिर्फ आर्यन खड़ा था, उसकी नब्ज तेजी से धड़क रही थी। उसने अपनी कलाई देखी, मृया के हाथ का निशान अब पूरी तरह उभर आया था, जैसे कोई टैटू।"मैं यहाँ हूँ," उसने हवा में कहा। "मृया, तुम हो न?"हवा में एक ठंडी लहर दौड़ गई। मृया धीरे-धीरे प्रकट हुई, उसकी आकृति आज और स्पष्ट थी। शायद इसलिए कि आर्यन अब उसे बेहतर देख पा रहा था,