भाग 1: वह जो मरना भूल गया आधी रात का समय था, पर शहर कभी सोता नहीं था। एम्स के तेरहवीं मंजिल के ऑपरेशन थियेटर की चमचमाती लाइटें अब धुंधली पड़ने लगी थीं। डॉ. आर्यन वर्मा ने अपने हाथों के लेटेक्स दस्ताने उतारकर कूड़ेदान में फेंके। आठ घंटे की लगातार सर्जरी थी, एक चालीस वर्षीय महिला का दिल बदलना, जिसकी बायीं निलय अब काम करने से इनकार कर चुकी थी। शरीर थका हुआ था, पर मन उससे भी ज्यादा।"सब ठीक है, डॉक्टर साहब?" सिस्टर अनिता ने पूछा, जो अभी तक सारे औजार साफ कर रही थी।आर्यन ने सिर हिलाया। "वेंटिलेटर