चलो दूर कहीं..! - 10

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चलो दूर कहीं... 10रवि के अप्रत्याशित व्यवहार से प्रतीक्षा सकते में थी, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अचानक से इसे क्या हो गया.. थोड़ी देर पहले तक एकदम ठीक ठाक था फिर ऐसी क्या बात हुई कि ये अनाप-शनाप बक रहा है। रवि मुंह लटकाए बैठा था और प्रतीक्षा भी चूल्हे के पास बैठी उसे घूर रही थी। चूल्हे का लकड़ी बुझ चुका था और उससे निकलता धुंआ बरामदे में फ़ैल गया था। धुंए से जब आंखों में जलन महसूस हुई तब प्रतीक्षा को चूल्हा बुझने का ध्यान आया और उसने पास पड़े माचीस की एक तीली