जब मटकू को मिला भोपू(पंचतंत्र शैली की हास्य-व्यंग्य कथा)जंगल के बीचों-बीच एक बूढ़ा पीपल का पेड़ था—वह पेड़ नहीं मटकू का आंगन था ,उसी पेड़ पर रहता था एक चंचल बंदर—मटकू।मटकू जितना फुर्तीला था, उतना ही शरारती भी।उसका एक ही नियम था—“जहाँ शांति हो, वहाँ थोड़ी हलचल जरूरी है!”दूसरों को सताने में उसे बड़ा मजा आता ,कभी वह किसी की पूँछ खींच देता,तो कभी किसी के मुँह से फल छीनकर खुद ही खा लेता । भोंपू का मिलनाएक दिन सुबह-सुबह टहलते-टहलते मटकू जंगल के किनारे पहुँचा।वहाँ उसे एक बैग मिला मटकू ने उसे उठाया, खोला और सुंघा फिर हल्का फूंका