टूटता हुआ मन - भाग 1

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टूटता हुआ मन भाग :-1(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच और तर्कशील स्वभाव—वह उन लोगों में से था जो जाति, वर्ण और परंपराओं को पुरानी और निरर्थक मानते थे।कॉलेज के दिनों में उसकी मुलाकात फरजाना से हुई—एक आत्मविश्वासी, स्वतंत्र विचारों वाली युवती।विचारों का मेल हुआ… और वही मेल धीरे-धीरे प्रेम में बदल गया।परिवारों ने विरोध किया—धर्म, जाति, समाज—हर तर्क सामने आया।रमेश के पिता—एक प्रतिष्ठित सेवानिवृत्त शिक्षक—बांकुड़ा जिले के घोष समाज में अत्यंत सम्मानित व्यक्ति थे।वे कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध जागरूकता फैलाते थे, समाज सुधार उनका जीवन था।उन्होंने अपने बेटे