बिल्ली जो इंसान बनती थी - 16

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शानवी की आँखों में गुस्सा और चोट का मिश्रण था।उसने महसूस किया कि कार्तिकेय ने उसकी भावनाओं को बहुत करीब से छू लिया था, लेकिन अब अचानक उसके सामने सच सामने आने पर उसका दिल डर और गुस्से से भर गया।शानवी (कड़क आवाज़ में, आंसू रोकते हुए) बोली - कार्तिकेय! तुम इस हद तक गिरोगे…मैने कभी नहीं सोचा था कि तुम ऐसा करोगे!कार्तिकेय ने कुछ कहने की कोशिश की, लेकिन उसके भीतर डर और बेचैनी भी थी। उसने धीरे-धीरे सिर झुका लिया।कार्तिकेय (धीरे, केवल अपने आप से) बोला - शानवी… मैं… मैं सिर्फ़ तुम्हें बचाना चाहता हूं…”शानवी ने उसे देखकर हाथ हिला