जब ससुराल जाती है जो भी उसे समझाया जाता है वैसे ही करती जाती है।वो यहां अपने लिए कुछ नहीं सोच पाती है।पति क्या खाएंगे?सास ससुर क्या खाएंगे?और अगर कोई और भी है तो सोचती है उनके लिए।अपना पसंदीदा हर वो चीज भूल कर सबके मन का करने लग जाती है।वैसे करते हुए उसे कितना भी दुख हो कभी दिखाती नहीं है।पति तो समझ नहीं पाता या समझना नहीं चाहता है कि पत्नी को आखिर चाहिए ही क्या?दो वक्त की रोटी, कपड़े, गहने ये सब ही चाहिए।कभी अगर ग़लती से भी उसके मायके से भाई आ जाएं तो कानाफूसी क्या हुआ