ढोंग-फरेब का एक आश्रम

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​ ढोंग-फरेब का एक आश्रम​ कमल चोपड़ा      दशहरे की छुट्टियाँ हो गई थीं। छुट्टी का आज पहला दिन था। सजग अपने दोस्तों श्रेयस और रोहण के साथ घूमने निकल पड़ा। घूमते-घूमते वे शहर के बाहरी तरफ आ पहुँचे थे। उन्होंने देखा कि वहाँ एक बहुत बड़ा आश्रम है। वहाँ मेला-सा लगा हुआ था। आश्रम के अन्दर-बाहर भक्तों की भीड़ लगी हुई थी और बाहर फल-फूल, प्रसाद, धूपबत्ती आदि बेचनेवालों की दुकानें बनी हुई थीं। पता चला वहाँ किन्हीं बाबा भभूतानंद जी महाराज की समाधि है। उन्हें पंच तत्त्व में विलीन हुए काफी वक्त हो चुका है। अब उनके शिष्य