चलो दूर कहीं..! - 5

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चलो दूर कहीं... 5उस प्राणी पर ही प्रतीक्षा का अस्तित्व टिका था,वही इस अंधेरे गुफा से निकलने का एक मात्र सहारा था और उसके एकाएक गायब हो जाने से वह व्याकुल थी, उसने पुरे गुफा को टटोल डाला..चिल्ला चिल्ला कर गला बैठा ली लेकिन कोई फायदा न हुआ..शायद वो यहां था ही नहीं और था भी तो जानबूझकर प्रतीक्षा से छुप रहा था.. वह इस निशब्द सन्नाटे में जरा सी आहट पाती तो उस दिशा में भागती और बैचैन नजरों से इधर उधर देखती.. जब काफी प्रयास के बाद भी वह नहीं मिला तो मायुस होकर वह घुटनों में अपने