मन की चमक

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 मन की चमक “अपमान की शुरुआत” सुबह की हल्की धूप खिड़की से अंदर आ रही थी।छोटे से घर में सादगी थी, लेकिन एक अजीब सी शांति भी…किरण आईने के सामने खड़ी थी।उसने हल्के से अपने चेहरे को देखा…फिर एक छोटी सी मुस्कान दी।“शायद आज सब ठीक हो जाएगा…”उसने धीरे से खुद से कहा।पीछे से उसकी माँ की आवाज़ आई“किरण, जल्दी कर बेटा… लड़के वाले आने वाले हैं।”किरण ने गहरी सांस ली।यह पहला मौका नहीं था…लेकिन हर बार की तरह उसके दिल में एक उम्मीद जरूर थी। रिश्ता देखने का सीनघर में हलचल शुरू हो चुकी थी।प्लास्टिक की कुर्सियाँ लग चुकी थीं, चाय