छोटे शहर का बड़ा नामधूप की तल्खी आज कुछ ज्यादा ही चुभ रही थी, जैसे वह भी रिषि की किस्मत का मज़ाक उड़ा रही हो। एक छोटे से शहर की तंग गलियों में धूल और शोर का एक अजीब सा संगम था। लोग अपनी-अपनी जद्दोजहद में मसरूफ थे—कोई रेहड़ी खींच रहा था, तो कोई पुरानी साइकिल की चेन चढ़ा रहा था। इसी भीड़ के बीच, एक लड़का अपने कंधे पर औजारों का भारी झोला लटकाए, पसीने में तर-बतर चला जा रहा था। नाम था—रिषि मल्होत्रा।नाम सुनते ही ज़हन में किसी आलीशान बंगले, चमचमाती गाड़ियों और महंगे सूट-बूट वाले रईसज़ादे की