चलो दूर कहीं..! - 4

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चलो दूर कहीं... 4एक पल के लिए प्रतीक्षा को उस विचित्र जीव को देखकर ऐसा लगा मानो वह कोई दैत्य हो..न कभी उसका किसी दैत्य से सामना हुआ था और न ही इस प्रकार के किसी जीव की स्मृति थी, फिर भी वह अपने अवचेतन के स्मृति से अनुमान कर रही थी । उसके माथे से निकलते तेज नारंगी रोशनी के कारण उसका आंख चौंधिया रहा था जिससे वह उसका चेहरा साफ साफ देख नहीं पा रही थी। लेकिन उसका डील डौल बड़ा अजीब था...लंबे लंबे ऊंट जैसे पीछे के पैर थे, और जानवर के जैसे आगे के दो पैर