नमस्कार मित्रो आज उजाले की ओर में डॉ. रश्मि चौबे की कविता की पुस्तक, `उद्गार` के बारे में परिचय.... मन के प्रांगण में प्रस्फुटित ‘उद्गार’ –डॉ. रश्मि चौबे ============================= वियोगी होगा पहला कवि कभी था किन्तु आज हर पल कविता के साथ बंधा हुआ है । जैसे गज़ल केवल कामिनी नहीं रह गई है ,वह पीड़ा,परेशानी,जीवन की वास्तविकता को ओढ़-बिछाती है । पीड़ा में दुखी होकर कही जाति है तो सुख व प्रेम में आंतरिक आनंद को महसूस करके कही जाती है । ठीक उसी प्रकार कविता भी है ,बेशक उसके लिखने का तरीका अलग है किन्तु उसका