शानवी गहरी नींद में थी। कमरा अंधेरे में डूबा हुआ था। तभी…खिड़की से हल्की थक-थक की आवाज़ आई। शानवी झटके में उठी। दिल जोर से धड़कने लगा।वो बोला - क्या… क्या हुआ?धीरे-धीरे वो खिड़की की तरफ बढ़ी। और बालकनी में झाँका…वो देखती ही रह गई। कार्तिकेय इंसान का रूप बिलकुल चुपचाप, चोरी की तरह बालकनी पर खड़ा था उसकी आँखों में हल्की बेचैनी, और डरशानवी ने ताज्जुब और गुस्से में कहा—तुम यहाँ क्या कर रहे हो?!पारितोष को पता चल गया तो… क्या होगा?ये तुम्हारे लिए भी और… मेरे लिए भी खतरा है!वो कदम बढ़ाकर खड़ी हो गई। आँखों में आग थी।वो