अध्याय 21: लौरा का क्रोध और रुद्र से टकरावमहागुरु की घोषणा सुनते ही लौरा का चेहरा अपमान और क्रोध से लाल हो गया। उसके भीतर एक आग सी जल उठी। वह बिना किसी को कुछ कहे, सीधे कन्या गुरुकुल की ओर बने अपने कक्ष की ओर भागी। उसकी चाल में इतनी तेज़ी थी कि कोई उसे रोक नहीं पाया।क्रोध का तांडवअपने कक्ष में पहुँचते ही लौरा ने भीतर से कुंडी लगा ली। फिर जो हुआ, वह क्रोध का तांडव था। तलवारों की खनक, लकड़ी के टूटने की आवाज़ें और बर्तनों के बिखरने की ध्वनि पूरे परिसर में गूँजने लगी। उसने