बरसात की हल्की-हल्की बूंदें टीन की छत पर गिर रही थीं। जहां वह बैठकर वह बरसात के बूंदों को अपने पन्ने में इस तरह बयां कर रही थी मानों वो बारिश का पानी नहीं उसके आंसू हों। उसका नाम आर्या था। सांवली सी, साधारण सी, भीड़ में खो जाने वाली लड़की। बस उसकी मुस्कान बड़ी प्यारी थी। गालों पर डिम्पल पड़ते थे उसके। वो उन लड़कियों में से थी जिन्हें कहानियों में “बेस्ट फ्रेंड” का रोल मिलता है… हीरोइन का नहीं। वो अक्सर अपने किस्मत को कोसती थी। वो जिस तरह कि जिंदगी जी रही थी, वो हर