वरिष्ठ पत्रकार और संपादक श्री जय शंकर मिश्र ने अगस्त 2025 में मुझे प्रख्यात समाज सेवी डा0जी०पी० भगत के बारे में बताया था |उन पर लिखी गई पुस्तक भी उन्होंने दी थी और पुस्तक समीक्षा की भी बात कही थी |हाथ की रेत के फिसल जाने की तरह समय भागता रहा और मैं अपनी निजी व्यस्तताओं में उलझा रहा और यह पुस्तक पढ़ नहीं सका | अंतत: मानो अपने आप से जिद करके मैंने दो फरवरी को इसे पढ़ डाला | पुस्तक के केंद्र बिन्दु में हैं अपने जीवन को दीन दुखियों,असहायों और वंचतों,परित्यक्त वृद्ध जनों