इंजीनियरिंग कॉलेज का पहला दिन।बड़ा कैंपस।नई इमारतें।अजनबी चेहरे।गुरप्रीत के हाथ में दो चीज़ें थीं —एक किताबों का बैग,और एक पुराना क्रिकेट बैट।क्लास में प्रोफेसर ने पूछा —“यहाँ कौन-कौन होस्टल में रहेगा?”गुरप्रीत ने हाथ उठाया।होस्टल का कमरा छोटा था, पर उसके लिए वह स्वतंत्रता का पहला कमरा था।दिन में क्लास।शाम को नेट प्रैक्टिस।रात को असाइनमेंट।शुरुआत आसान नहीं थी।गणित की क्लास में उसे महसूस हुआ कि स्कूल की नींव कमजोर थी।कई बार वह देर रात तक बैठकर समझने की कोशिश करता।कभी-कभी थकान में सोचता —“क्या मैं दोनों संभाल पाऊँगा?”उसी समय पिता की ट्रेन वाली घटना याद आ जाती।वह युवक… वह सम्मान… वह