Potty Robbers and Me - 2

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एपिसोड 2: सोने की खेती और शाही दावत---सीन 1: गली का माहौल – चुगलियों का बाज़ारबाहर गली में कर्फ्यू जैसा माहौल था…लेकिन सन्नाटा नहीं।हर घर की खिड़की से एक-एक गर्दन बाहर लटकी हुई थी।मोहल्ले की “CCTV आंटी” (मिश्राइन) अपने छज्जे से नाली को ऐसे घूर रही थींजैसे वहाँ से मछली नहीं…बल्कि खुद कुबेर भगवान प्रकट होने वाले हों।फुसफुसाहट शुरू—मिश्राइन (धीरे से):“अरे शर्मा जी की बहू, देखा तुमने? सावित्री ने नाली में बोरी क्यों लगाई थी? कहीं सारा सोना तो नहीं समेट लिया?”शर्मा की बहू:“हाय राम! हम तो कचरा समझकर बैठे रहे और वो लॉटरी मार गई? कल देखना, नए झुमके