अध्याय 19: अज्ञात संकट की छाया और गुरु-मंडल की चिंताअध्याय 19: रक्त-रंजित संदेश और नियति का क्रूर प्रहारशिखर मुकाबले की वह सुबह 'विशाल गुरुकुल' के इतिहास की सबसे सुनहरी सुबह हो सकती थी। हिमालय की चोटियों से टकराकर आती ठंडी हवाएँ आज विजय के गीतों जैसी लग रही थीं। उत्तर और दक्षिण परिसर के छात्र-छात्राएं अपनी अपनी कतारों में सजे हुए थे। केसरिया और नीले ध्वज हवा में लहरा रहे थे। हर योद्धा के चेहरे पर एक चमक थी, और हाथों में शस्त्रों की वह सधी हुई पकड़ थी जो बरसों के अभ्यास से आती है।लेकिन नियति के पास इस