13.1.26 मुज़ारे मुसम्मन अख़रब मकफ़ूफ़ महज़ूफ़ मफ़ऊल फ़ाइलात मुफ़ाईलु फ़ाइलुन 221 2121 12 21 21 2 घर फूंकने की हमको इजाजत न मिल सकी रुसवाइयों से फिर कभी राहत न मिल सकी बर्बादियों का जश्न मनाने चले थे हम माना बहार आई तो फुरसत न मिल सकी अफ़सोस ज़ोरदार हमे होता ये रहा राहत की मंडियों कोई राहत न मिल सकी लाशें बिछा के कौन ये गलियों में घूमता कातिल सभी मिले हैं हकीकत न मिल सकी माहौल इस बसंत का अब क्या बताएं हम बीमार को वो पहली तबीयत न मिल सकी अब