में और मेरे अहसास - 146

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बात बात दिल की बताने में देर कर देती हूँ में l मोहब्बत को जताने में देर कर देती हूँ में ll   सजने सँवरने में वक हाथ से निकल जाता l आईने को सजाने में देर कर देती हूँ में ll   है उजाला बहार भीतर तो अंधेरा इस लिए l रोशनी को जलाने में देर कर देती हूँ में ll   दिलचस्प है नजारे चारो तरफ ही तो सखी l मन में ताला लगाने में देर कर देती हूँ में ll   प्यार में कुछ एसा उलझ गई हूँ की होश खो ही गया है l खुद को