बात बात दिल की बताने में देर कर देती हूँ में l मोहब्बत को जताने में देर कर देती हूँ में ll सजने सँवरने में वक हाथ से निकल जाता l आईने को सजाने में देर कर देती हूँ में ll है उजाला बहार भीतर तो अंधेरा इस लिए l रोशनी को जलाने में देर कर देती हूँ में ll दिलचस्प है नजारे चारो तरफ ही तो सखी l मन में ताला लगाने में देर कर देती हूँ में ll प्यार में कुछ एसा उलझ गई हूँ की होश खो ही गया है l खुद को