अभी तक आपने पढ़ा कि अनन्या ने वीर की असलियत अपनी आँखों से देख ली। जिस व्यक्ति ने उसे गंगा की तरह पवित्र रहने की शर्त दी थी, वही ख़ुद रोज़ अय्याशी में डूबा हुआ था। वीर के कमरे में दूसरी लड़की को देखकर अनन्या का भ्रम पूरी तरह टूट गया और उसने उसे झूठा क़रार देते हुए साफ़ कह दिया कि अब वह अपने पति अनुराग के पास लौटेगी। अब इसके आगे- अनन्या जैसे ही जाने के लिए मुड़ी, वीर उसके सामने आकर खड़ा हो गया। उसने कहा, "अनु, तू झूठ कह रही है, मैं जानता हूँ। आज मैं