होली

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होली: वह ईड़ा गाँव(अल्मोड़ा) की होली (१९६७), अल्मोड़ा की होली(१९७२-७३), धनबाद की होली(१९८४) जोरहट(असम) की होली (२००९-११) आदि। याद करो तो सनसनाहट होने लगती है और हल्की गुदगुदाहट।मन फुर्र से उड़ता है और बैठ जाता है यहाँ-वहाँ।पर इसी बीच कहीं उलझ भी जाता है।न उसे आसमान दिखता है न धरती।होल्लियारों का लय, रंगों का बहाव देखते बनता था।मौसम में मादकता छायी रहती थी। ईड़ा में खड़ी होली खूब देखी जिसमें होल्लियारे हर घर पर जाकर आशीर्वादों की झड़ी लगा देते थे(आशीर्वादों का वह लय अब याद नहीं है,सुनने में बहुत मन मोहक होता था जैसे होली खेलत नन्द लाल