शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (4)

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                   शहद की गुड़िया - प्रकरण - 4           "अब तो बस इंतजार है उस पल का ज़ब ये सारी बातें हकीकत बन जायेगी. क़्या मेरे लिये आप इतने बेताब हो."       " बिल्कुल तुम से कई गुना ज्यादा. "        " दादु अब तो हमारी  दास्तान पन्नो. पर उतरने के लिये बिल्कुल तैयार हैं.. "         " आप की हर डांट और हरकत ने मेरी रूह को एक नया रंग दिया हैं. अब तो मैं आप की शहद की गुड़िया बन चुकी हूं.. "