पंखो मे बंधा प्रेम

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(अगली पीढी की भविष्यवाणी: स्वर्ण- विधि)विवाह के पश्चात, जब पक्षीलोक में शांति स्थिर हो चुकी थी, तब रानी रत्नावली अधिराज और एकांक्षी कोकाल- स्तंभ के समीप ले गईं—वह स्थान जहां भविष्य स्वयं अपना स्वर प्रकट करता था.काल- स्तंभ सदियों से मौन था.पर उस दिन.वह जाग उठा.जैसे ही एकांक्षी ने उस पर हाथ रखा,जिवंत मणि की शेष चेतना स्पंदित हुई.आकाश गहराया,और समय की परतें खुलने लगीं.एक दिव्य स्वर गूंजा—सुनो, पक्षीलोक के राजाओं.अब जो जन्म लेगा,वह केवल वारिस नहीं होगा—वह निर्णायक होगा।भविष्यवाणी प्रकट हुई—अधिराज और एकांक्षी की संतानतीन लोकों का रक्त वहन करेगी—पक्षीलोक की चेतना,मानव लोक का हृदय,और जिवंत मणि का संतुलन।आकाश