सुबह की पहली किरण ने अभी आसमान को छुआ भी नहीं था, लेकिन ऐशा की आँखों में नींद का एक कतरा भी नहीं था। वह कमरे के सबसे ठंडे और अंधेरे कोने में फर्श पर बैठी थी, अपने घुटनों को सीने से चिपकाए हुए। कल रात की बारिश की गूँज और अर्मान खान की वह बर्फीली आवाज़ उसके कानों में अभी भी हथौड़े की तरह बज रही थी।उसने अपने कांपते हाथों को देखा। वह अब उस दुनिया का हिस्सा थी जहाँ कानून अर्मान की उंगलियों के इशारों पर नाचता था।वह धीरे से उठी और कमरे के बीचो-बीच बिछे आलीशान ईरानी