VULTURE: बंधन, भरोसा और बगावतसीन 1 – रात का शहर, टूटी हुई खामोशीतेज़ हवा।ऊँची इमारत की चोटी पर वल्चर खड़ा है।नीचे शहर जगमगा रहा है, पर उसके चेहरे पर सन्नाटा है।पीछे से आवाज आती है।नेक्स (हल्के व्यंग्य में):"अगर ऐसे ही चुप खड़े रहे ना… तो लोग समझेंगे तुम कविता लिख रहे हो।"अर्जुन बिना मुड़े बोलता है—अर्जुन:"कविता नहीं… हिसाब।"ज़ारा और कायरो भी पीछे आ खड़े होते हैं।ज़ारा:"किस बात का?"अर्जुन मुड़ता है। आँखों में थकान और आग दोनों।अर्जुन:"हर बार हम साथ लड़ते हैं…हर बार मैं सोचता हूँ कि सब ठीक है…और हर बार कोई सच छिपा होता है।"खामोशी।सीन 2 – विश्वास की