बिल्ली जो इंसान बनती थी - 8

(1.6k)
  • 7.3k
  • 1
  • 2.3k

घड़ी की सुइयाँ 4 बजने ही वाली थीं। कार्तिकेय का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। साँसें थम-सी गई थीं। हर पल जैसे सदियों में बदल गया हो। शानवी अब भी गहरी नींद में थी। उसका सिर… उसके सीने पर। बाँहें कसकर उसके चारों तरफ़ लिपटी थीं।और फिर…⏰ जादुई समय — 4 बजेकार्तिकेय का शरीर धीरे-धीरे…सफेद बिल्ली में बदल गया उसका चेहरा, हाथ, और शरीर… सब छोटे पंजों और मुलायम फर में बदल गए। साँसें जैसे धीमी हो गईं। शानवी नींद में हल्की हिली।उसे लगा कोई ठंडा पंजा उसके ऊपर सरक गया है। उसने आँखें खोली…और चौंक गई।उसकी बाँहों में…वो