मेरी अधूरी सी मोहब्बत

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भाग 1बारिश की हल्की बूंदें खिड़की पर गिर रही थीं, और कमरे में फैली ठंडी हवा के साथ सना के दिल में भी एक अजीब-सी ठंडक उतरती जा रही थी। हाथ में पकड़ा हुआ पुराना खत, जिसकी स्याही अब हल्की पड़ चुकी थी, फिर भी उसके दिल के जख्म ताज़ा कर देता था।वो खत रेहान का था।सना ने धीरे से आंखें बंद कर लीं। यादों के दरवाज़े फिर खुल गए…दो साल पहले…दिल्ली यूनिवर्सिटी का पहला दिन। नए चेहरे, नई दोस्तियाँ, नई उम्मीदें। सना अपनी किताबें सीने से लगाए कॉलेज के गेट से अंदर जा रही थी कि अचानक किसी से