मुंबई की रात बाहर से जितनी चमकदार दिखती है, भीतर से उतनी ही बेरहम होती है.ट्रस्ट की इमारत से निकलते समय तारा ने पीछे मुडकर नहीं देखा.आकृति मेहता अब भी वही थी—थकी हुई, साधारण, काम से लौटी एक लडकी.लेकिन जैसे ही उसने टैक्सी बदली,फोन स्विच ऑफ कियाऔर एक तंग गली में उतरकर पैदल चलने लगी—वह आकृति नहीं रही.अब वह तारा थी.उसका सीक्रेट बेस शहर के उस हिस्से में थाजहाँ कोई बिना वजह नहीं जाता.एक पुरानी, बंद पडी मिल.सरकारी रिकॉर्ड में वह इमारत सालों पहले असुरक्षित घोषित हो चुकी थी.बाहर से जर्जर दीवारें, टूटी खिडकियाँ.अंदर—टेक्नोलॉजी, निगरानी और खामोशी.तारा ने एक खास