ज़ख्मों की शादी - 2

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मंडप, सजावट वही – लाल-सुनहरे फूल, सुनहरी रस्में, शहनाई की हल्की धुन।Shristi की आँखों में आशा की झलक आई जैसे ही उसने उस लड़के को देखा। और वो तुरंत उस लड़के की तरफ दौड़ पड़ी उसके पैरों से ताकत निकल गई और वह सीधे उस लड़के के सीने से चिपक गई।Shristi (foot-foot रोते हुए, काँपती हुई) बोली - कबीर जी… मुझे… मुझे बचाइए…ये...ये दरिंदा मुझसे शादी कर रहा है।Shristi का सिर उस लड़के के सीने से लगा हुआ था। उसकी सिसकियों में दर्द और राहत दोनों झलक रहे थे।Kabir Pratap SinghKabir ने ठंडी, पर गहरी आवाज़ में कहा। उसके शब्दों में