खेतों में खड़े खंभे

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आज काफी दिनों बाद मैं अपने गाँव जा रही थी।ट्रेन की खिड़की से बाहर देखते हुए मन में कई पुरानी यादें घूम रही थीं — बचपन, खेत, मिट्टी की खुशबू, और वो लोग जिनके बीच हम बड़े होते हैं।मेरा गाँव राजस्थान के दौसा जिले में है। यहाँ मीणा समाज की अच्छी-खासी आबादी है। इसलिए अक्सर विधायक हो या सांसद, अधिकतर इसी समाज से होते हैं।इससे यह लगता है कि शायद यहाँ दूसरे इलाकों के मुकाबले भेदभाव थोड़ा कम होगा।लेकिन मैं पूरी तरह यह भी नहीं कह सकती कि समाज से ऊँच-नीच या छुआछूत पूरी तरह खत्म हो गई है।क्योंकि सच