खामोशी का इकरार - CH-4 - अतीत का सच

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कोर्टरूम में सन्नाटा छा गया था। मीरा के शब्द हवा में तैर रहे थे, हर किसी को चौंका रहे थे। "आर्डर! आर्डर!" जज ने हथौड़ी बजाई। "मिस सिन्हा, क्या आप जानती हैं कि आप क्या कह रही हैं?" मीरा ने सिर हिलाया। उसके चेहरे पर एक अजीब शांति थी, जैसे एक बोझ उतर गया हो। "जी हाँ, योर ऑनर। मैं पूरी तरह से जानती हूँ। और मैं अपने अपराध का इकबाल करना चाहती हूँ।" प्रोसिक्यूटर अचंभित था। "मिस सिन्हा, आप किस अपराध की बात कर रही हैं? विक्रांत सिन्हा की हत्या की?" "नहीं। मायरा सिन्हा की हत्या की। मेरी बहन