पागलपन

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पागलपन – भाग 1: आरव की दुनियाआरव की सुबह हमेशा एक जैसी होती थी। हल्की धूप उसके कमरे की खिड़की से टकराकर दीवारों पर गोल-गोल धब्बे बना देती, और चाय की खुशबू पूरे घर में फैल जाती। पड़ोस के बच्चे खेलते हुए हँसी में उलझे रहते, और कभी-कभी उनके कुत्ते की आवाज़ उसकी नींद को हल्का-सा खींचकर बाहर की दुनिया में ले आती। आरव इस नियमितता को पसंद करता था। यही उसकी दुनिया थी। यही उसकी पहचान।लेकिन आज कुछ अलग था।आरव ने जैसे ही उठकर अपना कमरा देखा, उसे लगा कि हर चीज़ कुछ अजीब ढंग से बदल गई है।