मजबूरी का सौदा: एक अनकही शर्त - 1

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पहला अध्याय: किस्मत की ठोकर​शहर की चकाचौंध से दूर, एक पुराने और टूटे हुए मकान में अंजलि अपनी बीमार माँ के सिरहाने बैठी रो रही थी। डॉक्टर ने साफ़ कह दिया था कि अगर तीन दिन के अंदर माँ का ऑपरेशन नहीं हुआ, तो उन्हें बचाना नामुमकिन होगा।​ऑपरेशन का खर्चा— पाँच लाख रुपये।​एक अनाथ लड़की, जो दूसरों के घरों में ट्यूशन पढ़ाकर बमुश्किल अपना घर चलाती थी, उसके लिए पाँच लाख रुपये किसी पहाड़ की चोटी को छूने जैसा था।​"भगवान, मैं कहाँ से लाऊँ इतने पैसे? कोई तो रास्ता दिखाओ," अंजलि ने सिसकते हुए ऊपर वाले से गुहार लगाई।​तभी उसकी