लाईन में खडा़ आदमी

शीर्षक: “लाइन में खड़ा आदमी”सुबह के सात बजे थे। मोहल्ले की पानी की टंकी के सामने लगी लाइन में रमेश सबसे पीछे खड़ा था। हाथ में दो पीले कैन, आँखों में नींद और चेहरे पर एक अजीब-सी चुप्पी। शहर में पानी आता तो था, पर सबके लिए नहीं। जिनके पास मोटर थी, उनके लिए हमेशा; जिनके पास नहीं, उनके लिए लाइन।रमेश एक निजी स्कूल में चपरासी था। तनख़्वाह इतनी कि घर चलता रहे, सपने नहीं। उसकी पत्नी सीमा हर सुबह कहती,“आज ज़रा जल्दी आ जाना, बच्चों की फीस भरनी है।”रमेश हर बार सिर हिला देता। जवाब उसके पास भी नहीं