सफ़र-ए-दिल - जब नफ़रत जुनून में बदल जाए.. - 7

EPISODE 7​एक और रिश्तेदार (डरते हुए): "अभिमान, आपकी राजनीति ठीक है, पर आप अपनी राजनीति के लिए खानदान का नाम ख़राब नहीं कर सकते। एक ज़िलाधिकारी, वह भी गैर-राजस्थानी? लोग क्या कहेंगे?"​अभिमान ने देखा कि उसका परिवार, जिसे वह अपनी ताकत मानता था, अब उसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी बन रहा था। उनका विरोध सच्चा था, और इसने उसके घावों को फिर से कुरेद दिया था। उसके दिमाग में अन्वेषा का अड़ियल चेहरा घूम गया—उसने इस शादी को अपने अभिमान और सत्ता के लिए स्वीकार किया था, अब वह इसे अपने परिवार के डर से कैसे छोड़ सकता था?​अभिमान का अंतिम