सफ़र-ए-दिल - जब नफ़रत जुनून में बदल जाए.. - 2

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EPISODE 2(ज़ोरदार टकराव)​जब अभिमान अपनी बात कहकर बैठ जाता है, तो अन्वेषा खड़ी होती है। उसने फ़ाइल का एक हिस्सा उठाया।​अन्वेषा (शांत, पर आवाज़ में दम): "राठौड़ जी, आपकी भावनाएँ समझती हूँ। पर मेरी रिपोर्ट के हिसाब से, इस योजना के क़ानूनी दस्तावेज़ों में बड़ी कमियाँ हैं। कुछ ज़मीन अधिग्रहण और पर्यावरण की मंज़ूरी में नियमों को ज़ाहिर तौर पर नज़रअंदाज़ किया गया है।"​पूरा कमरा एकदम शांत हो जाता है। सरकारी अफ़सरों के चेहरे पीले पड़ जाते हैं।​अन्वेषा (आवाज़ में सख़्ती): "मैं इस प्रोजेक्ट को पास नहीं कर सकती। मुझे हर दस्तावेज़ को पूरी ईमानदारी से जाँचने के लिए दस