रामेसर की दादी (अंतिम भाग)

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बीसों साल बीत गए, सब कुछ कितना बदल गया। लेकिन आज वह मन बना कर उठा कि इस बार गांव जाना होगा तो दादी से जरूर मिलेगा।कुछ दिन बीते रामेसर अपने गांव आया और जैसा कि उसने तय कर रखा था दादी से मिलने अपने काका के घर पहुंचा।दादी अब वैसी न रह गई थी, उसका शरीर सिमट कर एक मुरझाये फूल की तरह हो गया था। जुते हुए खेत की धारियाँ जैसी होती है वैसी ही अनगिनत झुरियाँ उसके चेहरे पर थीं। उसकी चमड़ी मानो ऐसी कि जैसे किसी ने काले रंग की पॉलीथिन पहना दी हो।एक हंसती इमारत बदलकर