उज्जैन एक्सप्रेस - 5

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"कुछ बोझ कंधों पर नहीं, आत्मा पर होते हैं। और वो बोझ तब तक हल्के नहीं होते जब तक इंसान खुद को खो न दे।"   रात 11:49  — उज्जैन जंक्शन।   प्लेटफॉर्म की सबसे अंतिम बेंच पर एक लड़का बैठा था। उसके चेहरे पर गहराई थी — जैसे किसी ने वर्षों से मुस्कुराना छोड़ दिया हो। उसके पास न कोई सूटकेस था, न कोई टिकट, सिर्फ एक पुराना बैग, कुछ नोट्स, और एक अधूरी डायरी।     सुनील के लिए UPSC सिर्फ एक परीक्षा नहीं थी, वो एक वादा था — खुद से, अपने परिवार से, और उस समाज से