उज्जैन एक्सप्रेस - 4

  • 378
  • 129

"कुछ लोग मौत से डरते हैं... और कुछ लोग हर रोज़ उसी से मिलने की तैयारी करते हैं।"     रात 11:49 PM — उज्जैन जंक्शन।   प्लेटफॉर्म की आखिरी बेंच पर एक साया बैठा था। अंधेरे में धुंधली-सी आकृति, जिसे देखकर कोई राहगीर भी डर जाए। लेकिन वो डर किसी और का नहीं था — खुद उस इंसान का था, जो हर रोज़ खुद से लड़ता था, और हर बार हार जाता था। उसके चेहरे पर थकान नहीं, खालीपन था। वो खालीपन जो तब आता है जब इंसान सब कुछ खो चुका होता है — प्यार, इज्ज़त, और अपनी