यादों की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई - (56)

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                     : : प्रकरण - 56 : :       सुंदर ने भी खुद अपनी जिंदगी बर्बाद की थी. अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी थी.       उस ने पिछ्ली उम्र में शेयर बाजार में पदार्पण किया था.       कुछ भी हो उस का दिमाग़ तभी तेज था. वह पूरा दिन शेयर बाजार में डूबा रहता था.       सुबह 6-30 बजे वह टी वी खोलकर बैठ जाता था. हर एक शेयर के भाव देखता था. एक्सपर्टस  की राय सुनता था.       मैं उसे मोबाइल में देखकर भाव की जानकारी देता था. वह जरूर कुछ कमाया था. उस