: : प्रकरण 55 : : कहते हैं हर किसी क़े दिमाग़ में कुछ ना कुछ चहल पहल होती रहती हैं. दिमाग़ बिना सोचे एक पल भी रह नहीं सकता. मेरा भी कुछ ऐसा हाल था. मैं हर पल कुछ ना कुछ सोचता रहता था. मेरी जिंदगी में कई लोग आये थे, जिस की याद मुझे समय समय पर आती रहती थी. मेरी याद दास्त भी बड़ी तेज थी. कुछ भी चीज मानो फेविकोल की तरह मेरे दिमाग़ में घुसकर पूरी तरह चिपक जाती थी, जिसे मैं चाहकर भी मैं