(भाग 9) जब रात के साढ़े दस बज गए वह चुपचाप चाय बना लाई। चाय पीने के दौरान ही मैंने अचानक पूछा, अच्छा, एक बात बताओ, पति से तुम्हारी अनबनन क्यों हो गई?' सुनकर वह कुछ देर के लिए मायूस हो गई फिर अतीत में डूब कर बताने लगी : अमित से मेरी शादी हुई तो मैं खुशी से फूली नहीं समा रही थी। वह एक केयरिंग हसबैंड और लविंग पार्टनर थे, और शादी के शुरूआती दिन मानो किसी सपने की तरह थे। ऐसा लगता था, जैसे- पूरा दिन हम बस एक-दूसरे में खोए रहें! एक-दूसरे का आलिंगन ही हमारी