अथ गूँगे गॉंव की कथा - 22

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उपन्यास-   रामगोपाल भावुक                               अथ गूँगे गॉंव की कथा  22                 अ0भा0 समर साहित्य पुरस्कार 2005 प्राप्त कृति                                        22       गाँव में चार लोग इकट्ठे हुये कि पहले वे अपने-अपने दुखना रोयेंगे।उसके बाद गाँव की समस्याओं पर बात करने लगेंगे। उस दिन भी दिन अस्त होने को था, गाँव के लोग हनुमान जी के मन्दिर पर हर रोज की तरह अपने पशुओं को लेने इकट्ठे होने लगे। लोगों में पशुओं के चारे की समस्या को लेकर बात चल पड़ी। मौजी भी वहाँ आ गया। उसने लोगों में चल रही चर्चा सुन ली थी। वह